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Sunday, 13 January 2013

My first poetry.

ज़िन्दगी की राह़ो में अलग मेरा रास्ता |
कहाँ चला कहाँ हु मैं, अलग इसकी दास्ताँ ||
कुछ है नहीं,  कुछ था नहीं, कुछ होगा मेरे पास कभी,
बस इसी की नुमाइंश में कट रहा है रास्ता ||

ज़िन्दगी की राहों में अलग मेरा रास्ता |
कहाँ चला कहाँ हु मैं, अलग इसकी दास्ताँ ||

सोचने का मुझमे नया नजरिया आया था|
बस उसी पर मैंने अपना रास्ता बनाया था ||
रस्ते में पत्थर - ठोकर हुई मुझे भी थी,
बस उन्ही ने रास्तो पर चलना सिखाया था||
वोह मुझे अलग मान मुझ पर हँस रहे थे,
मैं उन्हें एक मान उन पर मुस्कुरा रहा था ||

ज़िन्दगी -- -- - - - - - - - - - - -  - -  रास्ता |
कहाँ चला - - - - - - -  -- - - - - - - - दास्ताँ ||

"रुके न तू झुके ना तू " इसी ने होंसला दिया |
इसी के सहारे मैंने मुकाम को पा लिया ||
ज़िन्दगी जीने का मुझ पर नया रंग छा गया |
मेरा एक अलग रास्ता मेरी ज़िन्दगी बना गया ||

ज़िन्दगी की राह़ो में अलग मेरा रास्ता |
कहाँ चला कहाँ हु मैं, अलग इसकी दास्ताँ ||

Saturday, 12 January 2013

शायद हम प्यार में है :)


"क्या ये फूल सारे गुलाब के हैं ?
और ये चेहरे सारे आफताब से हैं ?
या शायद हम प्यार में हैं |

ये चाँद ज्यादा मुस्कुरा रहा है |
ये सितारें ज्यादा चमचमा रहे हैं |
क्या ये सब आशिकी मिजाज में हैं ?
या शायद हम प्यार में है |

ये मैं इतना क्यूँ इतरा रहा ?
रोज़ मंदिर- मस्जिद जा रहा |
कोई नयी इबादत जहन में है ?
या शायद हम अब प्यार में है |

ये जो रूकती - रूकती साँसे है
और बेठिकाने से हो गए हम हैं |
कोई जादू-टोना तन-बदन पे हैं ?
या शायद हम भी अब प्यार के चंगुल में है |" :)

Thursday, 10 January 2013

तब पागलपन चाहत के साथ मिलता है |


परवान चढ़ती है मोहब्बत
पागलपन चाहत के साथ मिलता हैं |
जब मिलते-मिलने से
जाने का मन नहीं करता है |
जब खुशियाँ 'साथ' होने की
आंसूं बन दिख जाती है |
जब दिल को अच्छा लगता है
कोई अपना-सा लगता है |
जब जाते मंदिर-मस्जिद से
इबादत उसके लिए भी आती है |
जब नौं-नौं दिन भूखी रहकर
वो तुम्हारी तरक्की की दुआं करती जाती है |
परवान चढ़ती है मोहब्बत
पागलपन चाहत के साथ मिलता हैं  |  |

जब आशिकी के खातिर
तू अपनों से लड़ मरता है|
जब उसके नाज़ - नखरे के सिवा
और कुछ नहीं जमता है |
जब साथ उसके होने पर
घड़िया रुकने की दुआएं करता है |
जब उसको डर लगता है
तू उसका हाथ पकड़ता है |
तब
परवान  चढ़ती है मोहब्बत
पागलपन चाहत के साथ मिलता है |
तू उसके साथ जीने -मरने की
हर पल दुआएं करता है ||

Rejuvenating जब तक है जान



तेरी आँखों की मीठी शैतानियाँ
तेरे होठों की रंगीन निशानियाँ
तेरी जुल्फों की बेख़ौफ़ अदाकारियां
नहीं भूलूंगा मैं
जब तक है जान , जब तक है जान

तेरा सारे कसमे -वादे तोडना
तेरा खवाबो में भी आकर कोसना
तेरा सच्ची मोहब्बत से इसकदर खेलना
नहीं माफ़ करूँगा मैं
जब तक है जान , जब तक है जान

मदमस्त परिंदों के पीछे तेरे भागने से
बेवजह रोज - रोज तेरे इतराने से
मुझे छेड़ने वाली बेबाक शैतानियों से
मोहब्बत करूँगा मैं
जब तक है जान , जब तक है जान |

तेरी झूठी इश्क की बातो से
तेरे चुभते बे-रहम सवालों से
मेरे दर्द भरे इन ख्वाबो से
नफरत करूँगा मैं
जब तक है जान , जब तक है जान ...!!

तेरा मन बहला दूँ मैं



चाँद के टुकड़े को गोद में रखा है
भोंर की रौशनी को जेब में रखा है
की तू गर खफा हो कभी
तो तेरा मन बहला दूँ मैं
बौछारो को बादलों में ही
रोक कर रखा है ...
पंछी-परिंदों को बोल कर रखा है
- की तुझसे बतियाने आ जाये
तेरी छत के छज्जे पर ........
मेरे "बचकाने वाले मन" को
सम्भाल के रखा है .
और इसलिए नाराज है मेरा खुदा मुझसे
तेरे गम-दुःख-आंसुओं का रुख मोड़ के रखा है ।

Unconditional Love !




"बेहिसाब मोहब्बत के ,
नुक्सान हजारों है
लिखत - खाता होता तो,
तुझे गिरवी रख लेता .........
चुब्ती घुटन का जवाब लेता
बिखरे ख़्वाबों का हिसाब लेता
घायल लम्हों का हिसाब होता
खुनी नब्ज़ का हिसाब लेता
करके दिवालिया तुझे .....
साथ तेरे जीने का करार होता
काश ! इस मोहब्बत का भी हिसाब होता !" :)

Corruption kills

तेरे कफ़न में नही होगी जेब , ऐ भ्रष्टाचारी   
तो तू किसके लिए यह करता है
तेरी इस नादानी से
आज आम आदमी मरता है...!