सुना है एक पंछी अगर पिंजरे में कुछ साल के लिए कैद हो तो आजाद होने की चाह और उड़ने की क्षमता पिंजरे में ही दम तोड़ देती है जैसे तुझे मुक्कमल करने का ख्वाब अब चरमरा कर टूट चूका है कभी तेरी कमसिन मुस्कान कुछ जान फूक भी दे तो उम्रदराज इश्क दम तोड़ देता है
सुना तो ये भी है की किसी चीज़ को गर शिद्दत से चाहो तो पूरी कायनात लग जाती है उसको तुमसे मिलाने में मैंने तेरी यादों को शिद्दत से मिटाना चाहा मेरी पूरी कायनात ही मिट गई अजीब न-इंसाफी है| :)
इतनी सी है बात, हंगामा क्यूँ है आजकल फितरतो में, इतना ड्रामा क्यूँ है उस शहर की मौतें बिखर कर भी खबर नही हैं इस शहर तपन क्या बड़ी, इतना दिखावा क्यूँ है।
इश्क तारों की बिन्दू से उसके अक्स को जोड़ना है इश्क धरती के गरम सीने पे बारिश का होना है इश्क काजल के दायरे में उसकी कायनात सी आँखें है इश्क दूर तेरे जाने पे माँ का चुपके से रोना है इश्क बेजड की रोटी के साथ सरसों का साग है इश्क काली पड़ी अर्ध-रात में चाँद-चांदनी का साथ है इश्क दौड़ती हुई ज़िन्दगी में एक संभला हुआ पड़ाव है
इश्क का अंत इश्क से हो जरुरी नहीं है। इश्क जिंदगी का एक पड़ाव है, जहाँ हज़ारों इश्क है। :)