Pages

Wednesday, 11 February 2015

हंगामा क्यूँ है

इतनी सी है बात, हंगामा क्यूँ है
आजकल फितरतो में, इतना ड्रामा क्यूँ है
उस शहर की मौतें बिखर कर भी खबर नही हैं
इस शहर तपन क्या बड़ी, इतना दिखावा क्यूँ है। 

इश्क :)

इश्क 
तारों की बिन्दू से उसके अक्स को जोड़ना है
इश्क
धरती के गरम सीने पे बारिश का होना है
इश्क
काजल के दायरे में उसकी कायनात सी आँखें है
इश्क
दूर तेरे जाने पे माँ का चुपके से रोना है
इश्क
बेजड की रोटी के साथ सरसों का साग है
इश्क
काली पड़ी अर्ध-रात में चाँद-चांदनी का साथ है
इश्क
दौड़ती हुई ज़िन्दगी में एक संभला हुआ पड़ाव है

इश्क का अंत इश्क से हो जरुरी नहीं है।
इश्क जिंदगी का एक पड़ाव है, जहाँ हज़ारों इश्क है। :)

कुछ यार होते तो अच्छा था

दो-चार होते तो अच्छा था
कुछ यार होते तो अच्छा था

इस शहर में सारी रात भर
एक वो तारा है
एक मैं हूँ
वो 'चमकते' हुए भी अकेला है
फिर मैं किस जंगल का शेर हूँ

इस आधे-अधूरे ख्वाब में
कुछ नींद होती तो अच्छा था
तेरी याद होती तो अच्छा था
तू साथ होती तो अच्छा था। :)

तकदीर का इम्तेहान

उस बरसाती बूँद की तरह
तेरा एक छोर उस पत्ते से बंधा है
और एक छोर तड़प रहा है
मेरी हथेली में आकर सिमटने के लिए।।
आज इन लकीरों की
तकदीर का इम्तेहान है। :)

Tuesday, 10 June 2014

गर होता मैं चाँद

गर
होता मैं चाँद
तो ये जितने भी बुद्धिजीव
धरती पे कलम लिए बैठे है
इनसब पर
केस ठोक देता

जो देखो,
जिस ताल से मेल बैठा
वैसा ताल-मेल बैठा कर
हमरा लिंग परिवर्तन कर दिया
कभी किसी सामने वाली की खिड़की का आफ़ताब
कभी किसी महबूबा के माथे की बिंदिया
या अपना रिश्तेदार बनाए दिया

अरे भैया
हम जुनूनी Casanova है
पूरी रात चांदनी को बाहों में रखते है
और हजारो सालो से दिन-रात धरती के आजू-बाज़ू चक्कर मारते है।

धरती के attitude प्रॉब्लम से हम निपट लेंगे,
हमारी warning आप समझ जाओ

का है?
Casanova, समझे!

Wednesday, 14 May 2014

क्यूंकि तुम

क्यूंकि तुम
6 lane के खाली highway पे
एक सुपरबाइक की तरह हो
अब इश्क की topspeed पे
सिर्फ दौड़ना चाहता हूँ मैं

क्यूंकि तुम
बन्दूक की नली से निकली
वो आखिरी bullet हो
जो मेरे दिल में छेद कर
अब वहीँ बस गई है

क्यूंकि तुम
हिमालय से निकली
पवित्र गंगा की झील हो
बिल्लोर* सा मन, तिलिस्म सा बदन लिए
सांसारिक संगम से दूर
मेरे लिए बह रही हो

क्यूंकि तुम्हारी रूह
और मेरी रूह का मिलन
अब किसी तंत्र-मन्त्र और विद्या से
अलग नहीं किया जा सकता

क्यूंकि तुम
और मैं मिलकर
अब शून्य हो गए है
जिसका धरती पर कोई भी
भाग नही कर सकता। :)

बिल्लोर - crystal

कुछ कम ही सही, मुझे अपना कर दो

मुक्कमल मिलन का
हर सपना कर दो
कुछ कम ही सही
मुझे अपना कर दो

रात के कालीन में
शर्म दबा के रखकर
अपने होठों से
इन होंठो पे
चुटकी भर अफीम तुम मल दो
कुछ कम ही सही
मुझे अपना कर दो

लफ्जों को कह दो
जरा मौन होकर बैठे
धड़कन से धड़कन की
ख़ैर-औ-खबर लो

कुछ कम ही सही
मुझे अपना कर दो! :)