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Friday, 22 November 2013

मेरा इश्क |

मेरा इश्क
मेरे शहर की सड़क जैसा है
हर थोड़े माह में मरहम हो जाता है
कुछ नए, बड़े घाव लगाने के लिए |

दिवाली :)

वो जो सज-धज के निकली
चाँद ऐसा शरमाया
अच्छी भली रात
अमाव्यस्या हो गई

उसके नूर की चांदनी
फिर कुछ ऐसी फैली
जहां मे उस रात
दिवाली हो गई ।

Tuesday, 30 July 2013

इक जरा सी बात मान लो न |

इक जरा सी बात मान लो न
इन कजरारी आँखों से
काजल का एक टिका निकालकर
अपने कानो के पीछे भी
हल्का सा लगा लो न
इक जरा सी बात मान लो न

ये जो तेरी मुस्कान का
तिलिस्मी जाल बिछाया हुआ है,
मेरी रूह पे भी इसका आज
कब्जा सा जमा लो न
इक जरा सी बात मान लो न

ये जो शिकन सलवटे है माथे पर
अश्क इन गोरे गालो पर
जो भी बात अनकही दिल में है
सब मुझसे कह डालो न
इक जरा सी बात मान लो न |

Thursday, 25 July 2013

लड़का धार्मिक हो गया है आजकल ।

अब्र के जिल्द से निकलकर
अलसाई सुबह 
सूरज जैसे ही मेरी खिड़की तलक
पहुँचता है
मैं शताब्दी की रफ़्तार से तैयार होकर
मंदिर तलक पहुँच जाता हूँ
मेरी इबादत
सलवार-दुपट्टे में आती है वहां
नज़रे मिलते ही
दुपट्टा सम्भाले
मुहं फुलाए
जुल्फे सरकाए
ग़ुस्से में जो देखती है
मैं बंद आँखों पर तबस्सुम लाकर
उस पत्थर वाली मूर्ति को
उसकी दुआ मुक्कमल होने की
फरियाद लगा देता हूँ

चर्चे ये हो रहे हैं
लड़का धार्मिक हो गया है आजकल ।

अब्र = बादल ; जिल्द = cover ;
तबस्सुम = smile

Wednesday, 17 July 2013

commercialize इश्क

"इश्क का बाज़ार
बड़ा commercialize हो गया है
चाँद - तारों की बातों पे तो
आजकल बच्चे भी नही हँसते "! :)

इश्क वाले मजहब के पुजारी

हम secular देश की सरहदों में,
इश्क वाले मजहब के पुजारी है । :)

उधार में

उधार में मुट्ठी भर पुराने पल दे सकती हो क्या ?
ब्याज में पूरी ज़िन्दगी रख लेना
वरना, एक जाम मुस्कान ही पिला दो
रख सको तो बदले में, हमें ही रख लेना ।